सदियों पुराने जलाशय के साथ जुड़ी है श्री गणेश जी कि आस्था और इतिहास, आज भी श्रद्धालु करते हैं पूजा

(राकेश भास्कर..)
मोहनगढ़। बुंदेलखंड के के मध्य टीकमगढ़ जिले की मोहनगढ़ तहसील में स्थित नंदनवारा तालाब केवल जलस्रोत ही नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की प्राचीन जल संस्कृति, इतिहास और धार्मिक आस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। विशाल जलाशय के बंधान पर स्थापित भगवान श्री गणेश की प्रतिमा आज भी लोगों के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय लोग इन्हें मंगलमूर्ति के रूप में पूजते हैं और शुभ कार्यों से पहले यहां दर्शन करने पहुंचते हैं।
नंदनवारा तालाब को क्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक तालाबों में गिना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार यह तालाब बरगी नदी के जल को रोककर बनाया गया था। बाद के बुंदेला काल में इसके बांध का पुनर्निर्माण और विकास कराया गया। इसी दौरान बंधान पर पक्की दीवार, स्नान घाट और भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित किए जाने का उल्लेख मिलता है।
इतिहास के साथ जुड़ी है गणेश प्रतिमा
नंदनवारा तालाब के बंधान पर स्थित गणेश प्रतिमा को लेकर स्थानीय स्तर पर कई रोचक मान्यताएं और किंवदंतियां प्रचलित हैं। पुराने विवरणों में इस प्रतिमा से जुड़ी चोरी के प्रयास की घटना का भी उल्लेख मिलता है। ग्रामीणों के अनुसार प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने के बाद भी उसका एक हिस्सा बंधान पर रह गया था, जिसे आज भी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। इसी कारण यहां भगवान गणेश की उपस्थिति को तालाब के इतिहास और स्थानीय आस्था से जोड़कर देखा जाता है।
बुंदेलखंड की तालाब संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा
टीकमगढ़ और बुंदेलखंड क्षेत्र में प्राचीन तालाब केवल पानी संग्रह करने के साधन नहीं थे, बल्कि गांवों की बसाहट, खेती और सामाजिक जीवन का आधार रहे हैं। उपलब्ध स्रोतों के अनुसार टीकमगढ़ जिले में चंदेलकालीन तालाबों की बड़ी संख्या रही है और ये यहां की पारंपरिक जल संरचना का महत्वपूर्ण उदाहरण हैं।
नंदनवारा तालाब भी इसी गौरवशाली जल परंपरा से जुड़ा माना जाता है। तालाब का विशाल भराव क्षेत्र और उससे जुड़ी सिंचाई व्यवस्था लंबे समय से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उपयोगी रही है। यही कारण है कि यह स्थान प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है।
संरक्षण की जरूरत
इतिहास, जल संरचना और धार्मिक आस्था—तीनों को अपने भीतर समेटे नंदनवारा तालाब आज संरक्षण की ओर ध्यान की अपेक्षा रखता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐतिहासिक बंधान, गणेश प्रतिमा और तालाब क्षेत्र का व्यवस्थित संरक्षण किया जाए तो यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। टीकमगढ़ जिले की पुरानी तालाब संस्कृति को संरक्षित करने की आवश्यकता पर भी समय-समय पर चर्चा होती रही है
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